Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Subscribe
    • कविताएं
    • संपर्क
    • Vote for 2017 Best Seller
    • Best Seller 2018
    • सहयोग/ समर्थन
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.

    थोडी हकलाहट थोडी सी बेबाकी

    By December 4, 201039 Comments2 Mins Read
    आज राकेश श्रीमाल की कविताएँ. संवेदनहीन होते जाते समय में उनकी कविताओं की सूक्ष्म संवेदनाएं हमें अपने आश्वस्त करती हैं कि अभी सब कुछ खत्म नहीं हुआ है.  राकेश श्रीमाल मध्‍यप्रदेश कला परिषद की मासि‍क पत्रिका ‘कलावार्ता’ के संपादक, कला सम्‍पदा एवं वैचारिकी ‘क’ के संस्‍थापक मानद संपादक के अलावा ‘जनसत्‍ता’ मुंबई में 10 वर्ष संपादकीय सहयोग देने के बाद इन दिनों महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय में हैं। जहां से उन्‍होंने 7 वर्ष ‘पुस्‍तक वार्ता’ का सम्‍पादन किया। वे ललित कला अकादमी की कार्यपरिषद के सदस्‍य रह चुके हैं। वेब पत्रिका ‘कृत्‍या’ (हिन्‍दी) के वे संपादक है। कविताओं की पुस्‍तक ‘अन्‍य’ वाणी प्रकाशन से प्रकाशि‍त। इन दिनों एक उपन्‍यास लिख रहे हैं।
    कुछ प्रेम क‍‍वि‍ताएं
                 
    राह देखता
    टुकटुक
    टुकटुक
    घटता हुआ प्रेम
    बहुत बाद में समझ आता है
    कौन सा क्षण होता है
    कौन से शब्‍द
    कौन से पहर में
    क्‍या सोचता है मन
    कौन सी शिराओं से
    कौन सी धमनियों में 
    बहने लगता है
    किन रगों में
    सूनसान जैसा शून्‍य
    भरने लगता है खुद को
    ठीक-ठीक
    खुद की ही तरह
    घटने के बाद
    प्रस्‍फुटित होता है प्रेम
    राह देखता
    अपने सींचे जाने की
    प्रेम का अर्थ
    थोडे से पल
    थोडा सा ही सुख
    ढेर सारी प्रतीक्षा
    कुछ अनमनापन
    कुछ प्‍यास
    कुछ दृष्टि
    थोडी हकलाहट
    थोडी सी बेबाकी
    कुछ ठहराव
    कुछ भटकाव
    क्‍या
    प्रेम का
    होता है कोई एक अर्थ
    फिक्र
    फिक्र है
    तो प्रेम है
    फिक्र ना हो
    तो प्रेम भी ना हो
    किसने कहा ऐसा
    आखिर
    थोडा सोचते हैं
    फिर प्रेम करते हैं 
    या कि पहले प्रेम करते हैं
    फिर सोचते हैं
    आखिर
    हम क्‍या करते हैं
    सफर
    प्रेम
    एक ऐसा शहर
    जहां जाने के लिए
    प्रेम की ही
    कई पगडंडिया पार करनी पड़ती हैं
    नियति
    न जाने किन इशारों
    न जाने किन ध्‍वनियों
    न जाने किन शब्‍दों से
    कोई पुकारता है प्रेम में
    कोई अनसुना कर देता है
    समय
    प्रेम में
    कोई नहीं रहता
    प्रेम में
    केवल समय रहता है
    प्रति पल
    अपने को बदलता हुआ
    जि‍ज्ञासा
    कोई जब
    कहीं नहीं रहता
    क्‍या प्रेम में रहता है
    अनकहा
    वह थोड़ा मुस्‍कराती है
    थोड़ा उदास रहती है
    कभी कभी
    कर लेती है गुस्‍सा भी
    कभी पकड़ लेती है हाथ
    तो कभी छूना चाहती है
    अनदेखा भविष्‍य
    कोई नहीं
    जो समझ पाए 
    वह प्रेम करती है
    या प्रेम करना चाहती है
    आमंत्रण
    हथेली पर रखकर
    नहीं किया जा सकता
    प्रेम
    वह दिखे नहीं
    खुद को भी
    तभी संभव है प्रेम
    प्रेम में
    संभव ही नहीं
    प्रेम को देख पाना 

    Related Posts

    Драгон Мани: Мифический Зверь и Реальные Выигрыши

    June 20, 2026

    Tropicana Online casino Nj Applications on the internet Gamble

    June 19, 2026

    Regulamentação do jogo como a lei pode impactar apostadores e operadores

    June 19, 2026
    View 39 Comments
    Leave A Reply Cancel Reply

    Recent Posts

    • Драгон Мани: Мифический Зверь и Реальные Выигрыши
    • Tropicana Online casino Nj Applications on the internet Gamble
    • Regulamentação do jogo como a lei pode impactar apostadores e operadores
    • Najkorzystniejsze automaty online Graj po slot urządzenia vinyl kasyno bezpłatnie
    • Ultimat Casinon Utrike 2026

    Recent Comments

    No comments to show.
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo YouTube
    © 2026 jankipul. Designed by jankipul.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.