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    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
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    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.

    जीवन को छलता हुआ, जीवन से छला गया

    By January 8, 2011160 Comments2 Mins Read
    आज मोहन राकेश का जन्मदिन है. हिंदी को कुछ बेजोड़ नाटक और अनेक यादगार कहानियां देने वाले मोहन राकेश ने यदा-कदा कुछ कविताएं भी लिखी थीं. उनको स्मरण करने के बहाने उन कविताओं का आज वाचन करते हैं- जानकी पुल.


    १.
    कुछ भी नहीं 
    भाषा नहीं, शब्द नहीं, भाव नहीं,
    कुछ भी नहीं.
    मैं क्यों हूँ? मैं क्या हूँ?
    जिज्ञासाएं डसती हैं बार-बार
    कब तक, कब तक, कब तक इस तरह?
    क्यों नहीं और किसी भी तरह?
    आकारहीन, नामहीन,
    कैसे सहूँ, कब तक सहूँ,
    अपनी यह निरर्थकता?
    जीवन को छलता हुआ, जीवन से छला गया.
    कैसे जिऊँ, कब तक जिऊँ,
    अनायास उगे कुकुरमुत्ते-सा
    पहचान मेरी कोई भी नहीं आज तक.
    लुढकता एक ढेले-सा
    नीचे, नीचे और नीचे
    मैं क्या हूँ? मैं क्यों हूँ?
    भाषा नहीं,
    शब्द नहीं,
    भाव नहीं,
    कुछ भी नहीं.
    २.
    उन्नीसवाँ सिगार
    दिन का उन्नीसवाँ सिगार-
    पी लिया.
    अपने आत्मदाह में
    फिर एक बार जी लिया.
    ३.
    चाबुक
    ‘क्यों नहीं?’
    यह बात
    उस एक से ही नहीं,
    हर एक से
    एक-एक बार कही;
    उत्तर के मौन की
    विरक्त भाषा-एक-सी
    अपनी अधूरी कामना
    पीठ पर हर बार
    उसी तरह… उसी तरह…
    उसी तरह
    सही.
    ४.
    जो हमें नहीं मिला
    आओ
    हम जूझें!
    मिटटी के
    महामना को पूजें!
    बूझें वह सब
    जो हममें नहीं है,
    जो हमें नहीं मिला,
    उस सबसे सूझें!
    ५.
    दिन ढले
    दिन ढले, दिन ढले,
    आशा के उज्ज्वल दीप जले.
    पच्छिम में छिप रहा उजेला, छल-छल बहता पानी
    इनके ऊपर मस्त हवा से सुन-सुन नई कहानी,
    मुख में ले नन्हे-से तिनके-
    कहाँ बसेरा नया बसाने, यह दो पंछी साथ चले?
    दिन ढले, दिन ढले.
    यह भी दिन, वह भी दिन होगा, जब हम जा मंझधार
    ढलते सूरज की लाली में खो सारा संसार,
    लहरों में पतवार छोड़कर…
    उस घाटी में जा पहुंचेंगे, जिनमें सुन्दर स्वप्न पाले.
    दिन ढले, दिन ढले.
    (‘दिन ढले’ नामक फिल्म के लिए लिखा गया)

    जयदेव तनेजा सम्पादित ‘एकत्र’ से साभार 
       
       

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