Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Subscribe
    • कविताएं
    • संपर्क
    • Vote for 2017 Best Seller
    • Best Seller 2018
    • सहयोग/ समर्थन
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.

    पर्वत पर्वत धारा फूटे लोहा मोम सा गले रे साथी

    By August 21, 2011172 Comments3 Mins Read

    गोरख पांडे क्रांति के कवि थे. आज जनांदोलन के इस दौर में उनकी कुछ कविताएँ ध्यान आईं. आप भी पढ़िए- जानकी पुल.

    समय का पहिया
    समय का पहिया चले रे साथी 

    समय का पहिया चले 

    फ़ौलादी घोड़ों की गति से आग बरफ़ में जले रे साथी
    समय का पहिया चले
    रात और दिन पल पल छिन 
    आगे बढ़ता जाय
    तोड़ पुराना नये सिरे से 
    सब कुछ गढ़ता जाय
    पर्वत पर्वत धारा फूटे लोहा मोम सा गले रे साथी
    समय का पहिया चले
    उठा आदमी जब जंगल से 
    अपना सीना ताने
    रफ़्तारों को मुट्ठी में कर 
    पहिया लगा घुमाने
    मेहनत के हाथों से 
    आज़ादी की सड़के ढले रे साथी
    समय का पहिया चले 

    आशा का गीत
    आएँगे, अच्छे दिन आएँगें,
    गर्दिश के दिन ये कट जाएँगे ।

    सूरज झोपड़ियों में चमकेगा,
    बच्चे सब दूध में नहाएँगे ।

    सपनों की सतरंगी डोरी पर
    मुक्ति के फ़रहरे लहराएँगे ।

    उनका डर
    वे डरते हैं
    किस चीज़ से डरते हैं वे
    तमाम धन-दौलत
    गोला-बारूद पुलिस-फ़ौज के बावजूद ?
    वे डरते हैं
    कि एक दिन
    निहत्थे और ग़रीब लोग
    उनसे डरना
    बंद कर देंगे ।
    इन्कलाब का गीत
    हमारी ख्वाहिशों का नाम इन्क़लाब है !
    हमारी ख्वाहिशों का सर्वनाम इन्क़लाब है !
    हमारी कोशिशों का एक नाम इन्क़लाब है !
    हमारा आज एकमात्र काम इन्क़लाब है !

            ख़तम हो लूट किस तरह जवाब इन्क़लाब है !
            ख़तम हो भूख किस तरह जवाब इन्कलाब है !
            ख़तम हो किस तरह सितम जवाब इन्क़लाब है !
            हमारे हर सवाल का जवाब इन्क़लाब है !
            
    सभी पुरानी ताक़तों का नाश इन्क़लाब है !
    सभी विनाशकारियों का नाश इन्क़लाब है !
    हरेक नवीन सृष्टि का विकास इन्क़लाब है !
    विनाश इन्क़लाब है, विकास इन्क़लाब है !

            सुनो कि हम दबे हुओं की आह इन्कलाब है,
            खुलो कि मुक्ति की खुली निग़ाह इन्क़लाब है,
            उठो कि हम गिरे हुओं की राह इन्क़लाब है,
            चलो, बढ़े चलो युग प्रवाह इन्क़लाब है ।

    हमारी ख्वाहिशों का नाम इन्क़लाब है !
    हमारी ख्वाहिशों का सर्वनाम इन्क़लाब है !
    हमारी कोशिशों का एक नाम इन्क़लाब है !
    हमारा आज एकमात्र काम इन्क़लाब है !

    वतन का गीत
    हमारे वतन की नई ज़िन्दगी हो
    नई ज़िन्दगी इक मुकम्मिल ख़ुशी हो
    नया हो गुलिस्ताँ नई बुलबुलें हों
    मुहब्बत की कोई नई रागिनी हो
    न हो कोई राजा न हो रंक कोई
    सभी हों बराबर सभी आदमी हों
    न ही हथकड़ी कोई फ़सलों को डाले
    हमारे दिलों की न सौदागरी हो
    ज़ुबानों पे पाबन्दियाँ हों न कोई
    निगाहों में अपनी नई रोशनी हो
    न अश्कों से नम हो किसी का भी दामन
    न ही कोई भी क़ायदा हिटलरी हो
    सभी होंठ आज़ाद हों मयक़दे में
    कि गंगो-जमन जैसी दरियादिली हो
    नये फ़ैसले हों नई कोशिशें हों
    नयी मंज़िलों की कशिश भी नई हो.

    कविता कोश से साभार 

    Related Posts

    Драгон Мани: Мифический зверь или реальный выигрыш?

    June 21, 2026

    test

    June 21, 2026

    Драгон Мани: Мифический зверь или реальный шанс на выигрыш?

    June 21, 2026
    View 172 Comments
    Leave A Reply Cancel Reply

    Recent Posts

    • Драгон Мани: Мифический зверь или реальный выигрыш?
    • test
    • Драгон Мани: Мифический зверь или реальный шанс на выигрыш?
    • Dragon Money Сайт: Всё, что нужно знать о платформе
    • Драгон Мани Игры: Мифы и Реальность

    Recent Comments

    No comments to show.
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo YouTube
    © 2026 jankipul. Designed by jankipul.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.