Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Subscribe
    • कविताएं
    • संपर्क
    • Vote for 2017 Best Seller
    • Best Seller 2018
    • सहयोग/ समर्थन
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.

    सभी प्रतिमाओं को तोड़ दो: स्वामी विवेकानंद की कविताएँ

    By January 12, 2011Updated:January 12, 202113 Comments2 Mins Read
    आज स्वामी विवेकानंद की जयंती है. प्रस्तुत है उनकी कुछ कविताएँ-
    ==================================
    समाधि
    सूर्य भी नहीं है, ज्योति-सुन्दर शशांक नहीं,
    छाया सा व्योम में यह विश्व नज़र आता है.
    मनोआकाश अस्फुट, भासमान विश्व वहां
    अहंकार-स्रोत ही में तिरता डूब जाता है.
    धीरे-धीरे छायादल लय में समाया जब
    धारा निज अहंकार मंदगति बहाता है.
    बंद वह धारा हुई, शून्य में मिला है शून्य,
    ‘अवांगमनसगोचरं’ वह जाने जो ज्ञाता है.
    जाग्रत देवता
    वह, जो तुममें है और तुमसे परे भी,
    जो सबके हाथों में बैठकर काम करता है,
    जो सबके पैरों में समाया हुआ चलता है,
    जो तुम सबके घट में व्याप्त है,
    उसी की आराधना करो और
    अन्य प्रतिमाओं को तोड़ दो!
    जो एक साथ ही ऊंचे पर और नीचे भी है;
    पापी और महात्मा, ईश्वर और निकृष्ट कीट
    एक साथ ही है,
    उसीका पूजन करो-
    जो दृश्यमान है,
    ज्ञेय है,
    सत्य है,
    सर्वव्यापी है,
    अन्य सभी प्रतिमाओं को तोड़ दो!
    जो अतीत जीवन से मुक्त,
    भविष्य के जन्म-मरणों से परे है,
    जिसमें हमारी स्थिति है
    और जिसमें हम सदा स्थित रहेंगे,
    उसीकी की आराधना करो,
    अन्य सभी प्रतिमाओं को तोड़ दो!
    ओ विमूढ़! जाग्रत देवता की उपेक्षा मत करो,
    उसके अनंत प्रतिबिम्बों से से ही यह विश्व पूर्ण है.
    काल्पनिक छायाओं के पीछे मत भागो,
    जो तुम्हें विग्रहों में डालती है;
    उस परम प्रभु की उपासना करो,
    जिसे सामने देख रहे हो;
    अन्य सभी प्रतिमाएं तोड़ दो!
    प्याला
    यही तुम्हारा प्याला है,
    जो तुम्हें शुरु से मिला है,
    नहीं, मेरे वत्स! मुझे ज्ञात है-
    यह पेय घोर कालकूट,
    यह तुम्हारी मंथित सुरा- निर्मित हुई है,
    तुम्हारे अपराध, तुम्हारी वासनाओं से,
    युग-कल्पों-मन्वन्तरों से.
    यही तुम्हारा पथ है- कष्टकर, बीहड़ और निर्जन,
    मैंने ही वे पत्थर लगाये, जिन्होंने तुम्हें कभी बैठने नहीं दिया,
    तुम्हारे मीत के पथ सुहावने और साफ-सुथरे हैं
    और वह भी तुम्हारी ही तरह मेरे अंक में आ जायेगा.
    किन्तु, मेरे वत्स, तुम्हें तो मुझ तक यह यात्रा करनी ही है.
    यही तुम्हारा काम है, जिसमें न सुख है, न गौरव ही मिलता है,
    किन्तु, यह किसी और के लिए नहीं, केवल तुम्हारे लिए है,
    और मेरे विश्व में इसका सीमित स्थान है, ले लो इसे.
    मैं कैसे कहूँ कि तुम यह समझो,
    मेरा तो कहना है कि मुझे देखने के लिए नेत्र बंद कर लो.
    ==================================

    दुर्लभ किताबों के PDF के लिए जानकी पुल को telegram पर सब्सक्राइब करें

    https://t.me/jankipul

    Related Posts

    Драгон Мани: Мифический Зверь и Реальные Выигрыши

    June 20, 2026

    Tropicana Online casino Nj Applications on the internet Gamble

    June 19, 2026

    Regulamentação do jogo como a lei pode impactar apostadores e operadores

    June 19, 2026
    View 13 Comments
    Leave A Reply Cancel Reply

    Recent Posts

    • Драгон Мани: Мифический Зверь и Реальные Выигрыши
    • Tropicana Online casino Nj Applications on the internet Gamble
    • Regulamentação do jogo como a lei pode impactar apostadores e operadores
    • Najkorzystniejsze automaty online Graj po slot urządzenia vinyl kasyno bezpłatnie
    • Ultimat Casinon Utrike 2026

    Recent Comments

    No comments to show.
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo YouTube
    © 2026 jankipul. Designed by jankipul.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.