Close Menu
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Subscribe
    • कविताएं
    • संपर्क
    • Vote for 2017 Best Seller
    • Best Seller 2018
    • सहयोग/ समर्थन
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.

    सच, प्यार और थोड़ी-सी शरारत

    administrator_06848bBy administrator_06848bJune 21, 201743 Comments4 Mins Read

    खुशवंत सिंह की आत्मकथा ‘सच, प्यार और थोड़ी-सी शरारत’ पर युवा लेखक माधव राठौड़ की टिप्पणी – संपादक
    ===================================================

    अंग्रेजी के प्रसिद्ध पत्रकार, स्तम्भकार और विवादित कथाकार खुशवंत सिंह की आत्मकथा अपनी शैली में लिखा गया अपने समय का वह  कच्चा चिटठा है, जिसका दायरा रेगिस्तानी गाँव की गर्मी भरे दिनों से होकर क्नॉट प्लेस होते हुए लन्दन व पेरिस की सुनहरी शामों तक फैलता है।

    यह आत्मकथा अपने समय की घटनाओं में पाठक को पुनः झाँकने के लिए लिए एक बेहतरीन मौका मुहैया करवाती है। देश के आजाद होने से लेकर आज के भारत के निर्माण प्रक्रिया को उन्होंने बड़ी नजदीकी से देखा है इसलिए उन्होंने बड़ी बेबाकी से और तटस्थता से उन घटनाओं की सच्ची बयानी की है।

    वे हमेशा दिल्ली और दिल्ली के उन लोगों के आसपास ही रहे जिन्होंने इस देश के सिस्टम को चलाया इसलिए  यह खुशवंत की जीवनी के साथ साथ समकालीन भारतीय जनमानस की जीवन प्रक्रिया की भी विस्तृत व्याख्यान की ओर संकेत करता हुआ संक्षेप्त दस्तावेज  है। खुशवंत के पूर्वजों से लेकर तीसरी पीढ़ी की जानकारी देती हुई यह आत्मकथात्मक कृति पढ़ते समय निश्चित रूप से पाठकों को खुशवंत सिंह की शरारत  का आभास देती रहती है। खुशवंत ने अपनी दूसरी किताबों कि तरह इसे भी स्वाभाविक शैली में बड़ी सफ़ोगाई अंदाज में इसे लिखा है। जिसमें उन्होंने अपने बचपन जवानी और बुढ़ापे को सहजता से उजागर किया है जिसमें अपने किशोरावस्था की यौन इच्छाओ से लेकर युवा अवस्था की सृजन के वर्षों और बुढ़ापे की बीमारियों को सच्चाई से स्वीकारते हुए नजर आते है।

    युवा मन पर एक अच्छे शिक्षक और शिक्षण संस्था का कितना प्रभाव पड़ता है उसे आप खुशवंत की जीवनी में बाकायदा  देख सकते हो, जिसमें वे अपने शिक्षक टैगोर, लॉस्की, आईवर जैनिग्स की खूबियों को चित्रित करते हुए नजर आते है।

    वही कृतियां कालजयी कहलाती हैं जो अपने लेखक और अपने युग के बीत जाने पर लंबे समय तक पाठकों द्वारा पढ़ी और सुधीजनों द्वारा सराही जाती हो।

    जिस किसी ने खुशवंत को थोड़ा बहुत पढ़ा उसके मन में कुलबुलाहट रहती है कि आखिर यह इन्सान कैसा रहा होगा इसलिए यह तलब और जरूरत बहुत पहले से महसूस की जा रही थी कि खुशवंत  की आत्मकथा उन्हीं के मैलिस स्तम्भ की तरह शरारत भरी शैली में छपे जो थोड़ा सच और थोड़ी गप हो।

    आप उनके शरारत भरे अंदाज में लिखी गई आत्मकथा को पढ़ते हुए कई बार गंभीर हो जाते हो जहाँ पर भारतीय विदेश नीति, हमारे उच्चायुक्तों की कार्यशैली, उनके चाल चरित्र और चेहरे को वे बखूबी से उधेड़ते नजर आते है। हमारे और विदेशी विश्वविद्यालय स्तर की शिक्षा प्रणाली में भेद करते हुए उनके द्वारा  प्रिंस्टन और ऑक्सफ़ोर्ड वि.वि. में पढाये गये विषयों पर  के छात्रों की गहन जिज्ञासा और शिक्षकों के तरीको का सुंदर वर्णन किया है।

    सच्चाई को लेकर वो इतने बेबाक थे कि उन्होंने पाकिस्तान में ही पाकिस्तानी मीडिया के सामने ही पाकिस्तान के पिछड़ेपन के कारण पर बोल दिया-

    “आप या तो नई मस्जिदे बना लीजये या मोटर कारें”

    आत्मकथा में खुशवंत ने अपने राज्यसभा के कार्यकाल, आपातकालीन स्थिति और सिख दंगो को बड़ी नजदीकी से देखे गये चश्मदीद गवाह की तरह वर्णन किया है।

    अंतिम पन्नों पर खुदा से लड़ते हुए नजर आते है जिसमे वे धर्मों के पाखंड पर गहरी चोट करते है, वे बाह्य आडम्बरों कि बजाय आंतरिक शुद्धि पर ज्यादा जोर देते हुए नजर आते है।

    अपने मूलरूप में यह आत्मकथा लगभग चार सौ पृष्ठों में फैली हुई  है। यह कई शीर्षकों  में लिखी गई है जो रेगिस्तान के गाँव से शुरू होकर दिल्ली लाहोर होते हुए लंदन और पेरिस की यात्रा करवाती है दूसरे अन्तराल में भारत की गहरी खोज और सिख धर्म के इतिहास के बारे में आपको परिचय करवाती नजर आती है।

    आत्मकथा के आखिर में अजीबोगरीब और सिरफिरे इन्सान से भिडन्त और खुदा से जद्दोझह्द  करते नजर आते है। आखिर में एक लेखक को अपने लेखन प्रक्रिया और रचनाधर्मिता के गुणों के बारे में गंभीरता से लिखते हुए पाते हो जिसमे खुशवंत सिंह युवा लेखको को  लेखन और लेखक कि प्रतिबधता के बारे में बताते है तो साथ लेखक के सामने आने वाली चुनौतियों से भी रूबरू करवाते है।

    अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पढ़े जाने वाले भारतीय लेखकों में नीरद चोधरी, वी एस नोयपोल, अनीता देसाई के बाद खुशवंत ज्यादा चर्चित रहे आज भी उन्हें लोग बड़े चाव से पढ़ते है इसी परिपेक्ष्य में राजकमल प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह आत्मकथा इतनी पठनीय है कि यह पाठकों को अंत तक बांधे रखती है।

    administrator_06848b

    Related Posts

    Драгон Мани: Мифический зверь или реальный выигрыш?

    June 21, 2026

    test

    June 21, 2026

    Драгон Мани: Мифический зверь или реальный шанс на выигрыш?

    June 21, 2026
    View 43 Comments
    Leave A Reply Cancel Reply

    Recent Posts

    • Драгон Мани: Мифический зверь или реальный выигрыш?
    • test
    • Драгон Мани: Мифический зверь или реальный шанс на выигрыш?
    • Dragon Money Сайт: Всё, что нужно знать о платформе
    • Драгон Мани Игры: Мифы и Реальность

    Recent Comments

    No comments to show.
    जानकी पुल – A Bridge of World's Literature.
    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest Vimeo YouTube
    © 2026 jankipul. Designed by jankipul.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.