इस बात में कोई दो राय नहीं कि फणीश्वरनाथ रेणु हिंदी साहित्य के संत लेखक थे। लेकिन जब यही बात निर्मल वर्मा जैसे लेखक की क़लम कहती है तो बात में वजन आ जाता है। निर्मल वर्मा लिखते हैं– “रेणु जी पहले कथाकार थे जिन्होंने भारतीय उपन्यास की जातीय सम्भावनाओं की तलाश की थी।” यह लेख निर्मल वर्मा ने उस वक़्त लिखा था जब रेणु के निधन पर सारा हिंदी साहित्य परिवार सोगवार था। आज ‘रेणु’ जी का जन्मदिन है। इस अवसर पर प्रस्तुत है उस लेख का एक अंश- त्रिपुरारि =========================================== मैं उनसे केवल दो-तीन बार मिला था, पर आज भी…
