युवा शायर सीरीज में आज पेश है मस्तो की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 जोडऩे में रात दिन खुद को लगा रहता हूँ मैं कौन ये कहता है की यक्सर बना रहता हूँ मैं आईनों के शोर से हरदम घिरा रहता हूँ मैं देख के फिर अक्स अपना क्यों डरा रहता हूँ मैं बस यही इक बात खुद से पूछता रहता हूँ मैं जब बचा ही कुछ नही क्या सोचता रहता हूँ मैं उस से मिलने के लिए..या खुद से मिलने के लिए किस से मिलने के लिए यूँ भागता रहता हूँ मैं मैं उतर कर ज़िन्दगी में पाक रह सकता नही…
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युवा शायर सीरीज में आज पेश है सिराज फ़ैसल ख़ान की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 हमीं वफ़ाओं से रहते थे बेयकीन बहुत दिलो निगाह में आये थे महज़बीन बहुत वो एक शख़्स जो दिखने में ठीक-ठाक सा था बिछड़ रहा था तो लगने लगा हसीन बहुत तू जा रहा था बिछड़ के तो हर क़दम पे तेरे फ़िसल रही थी मेरे पाँव से ज़मीन बहुत वो जिसमें बिछड़े हुए दिल लिपट के रोते हैं मैँ देखता हूँ किसी फ़िल्म का वो सीन बहुत तेरे ख़याल भी दिल से नहीं गुज़रते अब इसी मज़ार पे आते थे ज़ायरीन बहुत तड़प…
युवा शायर सीरीज में आज पेश है शहबाज़ रिज़वी की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 उदासी ने समां बांधा हुआ है खुशी के साथ फिर धोका हुआ है मुझे अपनी ज़रूरत पर गई है मेरे अंदर से अब वो जा चुका है कहानी से अजब वहशत हुई है मेरा किरदार जब पुख़्ता हुआ है मैं हर दर पर सदाएं दे रहा हूं कोई आवाज़ दे कर छुप गया है मौत तो चलिए फिर भी आनी है नींद कमबख्त को हुआ क्या है ग़ज़ल-2 ख्वाब के आस पास रह रह कर थक गया हूं उदास रह रह कर बढ़ रहे हैं…
युवा शायर सीरीज में आज पेश है नज़ीर ‘नज़र’ की ग़ज़लें – त्रिपुरारि ====================================================== ग़ज़ल-1 वो शे’र सुन के मिरा हो गया दिवाना क्या मैं सच कहूँगा तो मानेगा ये ज़माना क्या कभी तो आना है दुनिया के सामने उसको अब उसको ढूँढने दैरो-हरम में जाना क्या ख़ुशी के वास्ते जद्दो-जहद बहुत की है पड़ेगा वैसे मुझे दर्द भी कमाना क्या सुना है काम चलाते हो तुम बहानों से उधार दोगे मुझे भी कोई बहाना क्या तुम्हारी यादों की गर्मी है सर्द रातों में लिहाफ़ ऐसे में अब ओढ़ना-बिछाना क्या जलेगा जितना भी…
आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है दसवाँ यानी अंतिम भाग – त्रिपुरारि ======================================================== अफवाहें देती रही ज़ख्मों पर हवा कहाँ जाता है शोहरत की कीमत जरूर चुकानी पड़ती है. प्रसिद्ध लोगों की आचार-व्यवहार से ही फ़िल्मी मीडिया का काम चलता है. उनका निजी जीवन निजी नहीं रह पाता. लोग जानना चाहते हैं कि परदे से बाहर, उनके प्रिय नेता कैसा जीवन जीते हैं, उनकी क्या गतिविधियाँ हैं. जब मीना के शराब के अत्यधिक सेवन की ख़बरें आ रही थी,…
आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है नौवाँ भाग – त्रिपुरारि ======================================================== गहरी खाई थी अभिनेत्री मीना कुमारी और स्त्री मीना कुमारी के बीच अभिनेत्री मीना कुमारी और स्त्री मीना कुमारी के बीच गहरा अंतर था. यह अजीब बात थी कि एक सक्षम अभिनेत्री के तौर पर मीना कुमारी की इच्छाओं का पूरा सम्मान किया जाता था, फिल्म की पटकथा से लेकर परिधान के चयन पर मीना जी से बकायदा सलाह ली जाती थी ‘दिल अपना और प्रीत पराई’ में…
आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है आठवाँ भाग – त्रिपुरारि ======================================================== पिंजरे बदलते रहे, मैना वही रही बचपन में मीना कुमारी अपने पिता के साथ दादर में रहती थी फिर शादी करके सायन आई. फिर कुछ समय के बाद दोनों युगल दम्पति आ गए. 1964 में कमाल अमरोही द्वारा अपने सेक्रेटरी अली बाकर को साये की तरह मीना कुमारी के साथ रहने का निर्देश था. एक दिन जब युवा लेखक गुलज़ार को अपने मेकअप रूप के भीतर आने की मीना…
आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है सातवाँ भाग – त्रिपुरारि ======================================================== बच्चों की आपा- मीना कुमारी मीना कुमारी को बच्चों से बहुत प्रेम था, फिल्मों में वह ममतामयी माँ और बहन तो थी ही, असल जिंदगी में भी बच्चों से असीम लगाव था उन्हें। बच्चे बमुश्किल ही किसी से अपनी मासूम रूह को जोड़ पाते हैं, शायद मीना जी के नर्म स्वभाव के कारण ही वे उनके नज़दीक जाते थे. मीना कुमारी के साथ फिल्म में काम करने वाले…
आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है छठा भाग – त्रिपुरारि ======================================================== कद्दावर नायक, जो मीना कुमारी के कद से ऊपर नहीं उठ सके पिता और पति के बीच अपने अस्तित्व को तलाशती मीना कुमारी हमेशा अपने काम के प्रति समर्पित रही। किरदारों की आड़ में खुद को भुला देना, उन्हें बखूबी आता था। अपने सभी साथी कलाकारों के साथ उनका सामंजस्य कमाल का था। भारत भूषण के साथ अपनी पहली हिट फिल्म‘ बैजू बावरा’ की जोड़ी को खूब सराहा…
आप पढ़ रहे हैं तन्हाई का अंधा शिगाफ़। मीना कुमारी की ज़िंदगी, काम और हादसात से जुड़ी बातें, जिसे लिख रही हैं विपिन चौधरी। आज पेश है पाँचवां भाग – त्रिपुरारि ======================================================== सपनों के राजकुमार के हाथों में कलम थी मीना कुमारी का जीवन बेहद जटिल और अनुभवों का खासा धनी था. कुछ ऐसा ही मिज़ाज़ उनके प्रेम का भी रहा, जो एक दुर्घटना की रास्ते पर चल कर उनके सामने आया. 1951 के दौरान बन रही फिल्म ‘तमाशा’ के सेट पर मीना कुमारी की मुलाकात कमाल अमरोही से हुयी, इस मुलाकात के मध्यस्त थे प्रसिद्ध अभिनेता अशोक कुमार. इससे…
